ह्यूमन राइट्स प्रोटेक्शन सेल (एचआरपीसी) का अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार अधिवेशन-2025 संपन्न
(देश-विदेश की 30 से अधिक दिग्गज हस्तियों ने एक मंच पर दिए सशक्त संदेश)
नई दिल्ली, 10 दिसंबर। ह्यूमन राइट्स प्रोटेक्शन सेल (एचआरपीसी) द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार अधिवेशन-2025, 10 दिसंबर 2025 शाम 06 से 12 बजे तक छह सत्रों में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। भारत, नेपाल, ब्रिटेन और स्वीडन से शामिल न्यायाधीशों, मंत्रियों, अधिवक्ताओं, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सूचना के अधिकार से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता, बाल सुरक्षा, महिला तस्करी, जेल सुधार और खाद्य सुरक्षा तक हर मुद्दे पर ठोस और प्रेरक विचार रखे।
अधिवेशन के पहले सत्र में मुख्य अतिथि पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त यशवर्धन कुमार सिन्हा ने कहा, “सूचना का अधिकार लोकतंत्र का सबसे मजबूत हथियार है, यह भ्रष्टाचार रोकता है और नागरिकों को सशक्त बनाता है।” राजस्थान की उपमुख्यमंत्री श्रीमती दीया कुमारी ने अधिवेशन के लिए शुभकामनाएं प्रेषित कीं। गुजरात के राज्य मंत्री कौशिक वेकरिया ने डिजिटल सेवाओं से नागरिकों को जोड़ने के प्रयासों का जिक्र किया। सर्वोच्च न्यायालय अधिवक्ता मनोज गोरकेला ने जोर दिया कि ऐसे अंतर्राष्ट्रीय मंचों का निरंतर आयोजन ही मानवाधिकार उल्लंघनों को रोक सकता है एवं समाज में बदलाव ला सकता है।
अधिवेशन के दूसरे सत्र में दिल्ली उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश तलवंत सिंह ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के दोहरे प्रभाव पर चेताया और कहा कि बिना नैतिक नियमन के यह गोपनीयता और रोजगार के लिए खतरा बन सकता है। सर्वोच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. आदिश सी. अग्रवाला ने भारतीय संविधान को “दुनिया का सबसे उदार संविधान” बताया। तिहाड़ जेल के पूर्व कानून अधिकारी सुनील कुमार गुप्ता ने बंदियों को शिक्षा, स्वास्थ्य और पुनर्वास की सुविधा देने पर बल दिया। एचआरपीसी की राष्ट्रीय ब्रांड एंबेसडर करिश्मा हाड़ा ने युवाओं से मानवाधिकार जागरूकता के लिए आगे आने की अपील की।
अधिवेशन के तीसरे सत्र में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एच. पी. सिंह ने बाल तस्करी और शोषण रोकने के लिए सख्त कानूनों की जरूरत बताई। सर्वोच्च न्यायालय बार के पूर्व उपाध्यक्ष प्रदीप राय ने आम भाषा में नागरिक अधिकारों की व्याख्या की। प्रसिद्ध विधि विद्वान मनमोहन जोशी (एम.जे. सर) ने प्राचीन काल से आज तक मानवाधिकारों की रोचक यात्रा सुनाई। नेपाल की पद्मश्री अनुराधा कोइराला ने तीन दशक के अनुभव के आधार पर महिला-बाल तस्करी रोकने, शिक्षा और रोजगार पर जोर दिया।
अधिवेशन के चौथे सत्र में लंदन की अंतर्राष्ट्रीय मीडिएटर डॉ. रेनुराज ने कहा, “मध्यस्थता व्यक्तिगत से अंतर्राष्ट्रीय विवाद तक शांति और कम खर्च में सुलझा सकती है।” फिल्म निर्माता संदीप मारवाह ने फिल्मों को मानवाधिकार जागरूकता का सबसे प्रभावी माध्यम बताया। सर्वोच्च न्यायालय अधिवक्ता नवीन शेलर ने एआई के खतरों और सख्त नियमन की मांग की। दूरदर्शन के वरिष्ठ पत्रकार राजेश मिश्रा ने कहा कि एआई मानव की सोचने की क्षमता को प्रभावित कर रहा है, इस पर गंभीर चिंतन जरूरी है।
अधिवेशन के पांचवें सत्र में उत्तर प्रदेश जिला न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश महेश पूरी ने त्वरित न्याय को मानवाधिकार का आधार बताया। शिक्षाविद् अनिल कुमार उपाध्याय ने फर्जी मुकदमों को मानवाधिकार का सबसे बड़ा हनन करार दिया। गुजरात जिला उपभोक्ता न्यायालय के न्यायाधीश संदीप कुमार पंड्या ने स्कूल बसों में जीपीएस, सीसीटीवी और पुलिस पेट्रोलिंग अनिवार्य करने की मांग की। स्वीडन की महिला अधिकार कार्यकर्ता डॉ. सोनिया ने लैंगिक समानता को वैश्विक प्राथमिकता बताया।
अधिवेशन के छठे सत्र में एचआरपीसी चेयरपर्सन एवं विश्व प्रसिद्ध अधिवक्ता डॉ. ज्योति जोंग्लुजू ने कहा, “समान अधिकार के बिना कोई सभ्यता जीवित नहीं रह सकती।” मीडिया सेल अध्यक्ष डॉ. शूलपाणी सिंह ने मीडिया को मानवाधिकारों का सबसे बड़ा रक्षक बताया। एजुकेशन सेल अध्यक्ष डॉ. रविंद्रनाथ सिंह ने एआई युक्त शिक्षा को समावेशी बनाने पर जोर दिया। फूड सेफ्टी सेल चेयरमैन डॉ. भारत कुलकर्णी ने खाद्य सुरक्षा को मौलिक मानवाधिकार घोषित करते हुए वैश्विक मानकों के पालन की अपील की। इस सत्र के अंत में सभी पदाधिकारियों का परिचय हुआ।
अधिवेशन के अंत में एचआरपीसी के सभी राष्ट्रीय व प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों ने अतिथियों व प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। संचालन राष्ट्रीय सचिव श्रीमती रश्मि बाला व राष्ट्रीय प्रमोटर श्रीमती रेखा चौरसिया ने कुशलतापूर्वक किया।
यह अधिवेशन मानवाधिकार संरक्षण के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय बन गया।